कॉम्पिटिटिव एग्जाम (JEE, NEET, UPSC, SSC, Banking, Railway आदि) स्टूडेंट्स को इतने तough क्यों लगते हैं? ये सवाल लगभग हर स्टूडेंट के मन में आता है। असल में ये मुश्किल इसलिए नहीं लगते क्योंकि “तुम कमजोर हो” — बल्कि इनके पीछे कुछ बहुत सच्चे और वास्तविक कारण हैं।
यहाँ वो मुख्य कारण हैं (और हर कारण के साथ छोटा समाधान भी):
- सिलेबस बहुत बड़ा और डीप होता है
- 10-12 सब्जेक्ट्स, हजारों टॉपिक्स, हर टॉपिक में डिटेल।
- एक साथ सब कुछ कवर करने का डर लगता है। समाधान: सिलेबस को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँट लो। हाई वेटेज टॉपिक्स पहले करो (80/20 रूल)।
- लाखों बच्चे एक ही सीट के लिए लड़ रहे हैं
- SSC CGL में 1 सीट पर 200-300 लोग, UPSC में 1 सीट पर 1000+।
- सिर्फ अच्छा नहीं, टॉप 1% में आना पड़ता है। समाधान: “कॉम्पिटीशन” से डरने की बजाय “अपनी परफॉर्मेंस” पर फोकस करो। रोज़ 1% बेहतर बनो — 1 साल में बहुत आगे निकल जाओगे।
- टाइम बहुत कम लगता है
- 60-180 मिनट में 100-200 सवाल।
- स्पीड + एक्यूरेसी दोनों चाहिए। समाधान: रोज़ टाइमर लगाकर प्रैक्टिस करो। मॉक टेस्ट में टाइम मैनेजमेंट सीखो।
- नेगेटिव मार्किंग का डर
- गलत जवाब से मार्क्स कटते हैं → गेसिंग से डर लगता है। समाधान: पहले 70-80% पक्के सवाल करो। बाकी पर स्मार्ट गेसिंग सीखो (एलिमिनेशन मेथड)।
- लंबी और लगातार तैयारी
- 6 महीने से 2 साल तक रोज़ 8-10 घंटे।
- बीच में मोटिवेशन गिर जाता है। समाधान: छोटे-छोटे गोल्स बनाओ (हर हफ्ते 1 चैप्टर पूरा)। हर गोल पूरा होने पर खुद को रिवॉर्ड दो।
- सही गाइडेंस और रिसोर्स की कमी
- क्या पढ़ें, कैसे पढ़ें — ये कन्फ्यूजन सबसे बड़ा स्ट्रेस देता है। समाधान: 1-2 भरोसेमंद सोर्स चुनो (Lucent, RS Aggarwal, Laxmikanth)। ऑनलाइन: Adda247, Unacademy, Physics Wallah के फ्री लेक्चर्स।
- दबाव और तुलना
- पैरेंट्स, रिश्तेदार, दोस्त — सब पूछते हैं “कितना पढ़ लिया?”
- तुलना से स्ट्रेस बढ़ता है। समाधान: अपनी प्रोग्रेस से तुलना करो, दूसरों से नहीं। रोज़ 1% इम्प्रूवमेंट पर फोकस करो।
सबसे छोटा और सबसे पावरफुल मंत्र
“मुश्किल एग्जाम नहीं लगता, बिना प्लान के तैयारी मुश्किल लगती है।”
जब तुम्हारे पास:
- क्लियर प्लान
- रोज़ प्रैक्टिस
- रिवीजन का सिस्टम
- हेल्थ और मोटिवेशन का ध्यान
होता है — तब वही एग्जाम आसान लगने लगता है।

